`आपको तो हम मधेशका मसिहा समझते थे´।(कविता )


  • Aavash Guru

आप हि हमसे किस्ता किस्तामे दगाबाजि कि ,
हम तो आपसे बेपनाह मोहब्बत कर्ते थे ।

आप हि ने हमारे खुनोका गलत इस्तेमाल किया
हम तो आपके कहने पर हस्ते हस्ते अपना बलिदानि देते थे ।

आप हि हमारे भोट ले जाकर शासको कि चरणोंमे चढाते रहे
और भोलेभाले हम तो १५ सालो से भोट देते रहे।

आप हैं कि मधेशवाद कहिँ नहि पढे
हम तो आपको मधेशवादका प्रध्यापक मान्ते थे ।

आप हि जातिवादी दलदल मे फसे
हम तो आपके मधेश मुक्तिकर्ता समझते थे ।

आप हि केवल आठ जिल्ला वला मधेस लिए
हम तो आपके स्वायत्त मधेश एक प्रदेश वला सम्राट मान्ते थे ।

आपहि असोज तीन काला दिनको संविधान दिवसके रुपमे मनाए
हम तो आपको मधेस बिरोधी संविधान जलाने बाले योद्धा मान्ते थे।

आपहि हमारे मधेश प्रेमको सत्ता से सम्झौता किए
हम तो आपको मधेसका मसिहा समझते थे ।

आप ने हि हमसे बेवफाई कि
और मजबूरन हमने भि सारा नाता तोड़ लिया ।

                               

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